समास સમજૂતી 5
🚀 समास का महा-संग्रह
जितने ज़्यादा उदाहरण, उतनी पक्की समझ!
🤝 द्वंद्व समास (जहाँ दोनों VIP हैं)
जब दोनों पद प्रधान हों। पहचान: बीच में योजक चिह्न (-) या 'और' का आना।
अन्न-जलअन्न और जल
पाप-पुण्यपाप और पुण्य
देश-विदेशदेश और विदेश
खट्टा-मीठाखट्टा और मीठा
आज-कलआज और कल
धनी-निर्धनधनी और निर्धन
दूध-दहीदूध और दही
हार-जीतहार और जीत
💡 मज़ेदार बात: इसमें अक्सर "विलोम" (Opposites) जोड़े पाए जाते हैं।
🔄 अव्ययीभाव (पहला पद जादूगर)
पहला पद अव्यय या उपसर्ग होता है, जो पूरे शब्द का अर्थ बदल देता है।
यथामतिमति के अनुसार
आमरणमरण तक
प्रतिपलप्रत्येक पल
निस्संदेहसंदेह के बिना
अनुरूपरूप के योग्य
भरपेटपेट भरकर
यथासमयसमय के अनुसार
हाथों-हाथहाथ ही हाथ में
🔗 तत्पुरुष (रिश्तों की डोर)
दूसरा पद मुख्य होता है। विग्रह करने पर कारक चिह्न (का, की, से, के लिए) प्रकट होते हैं।
राजद्रोहीराजा से द्रोह
स्वर्गवासीस्वर्ग में रहने वाला
देशनिकालादेश से निकाला
हस्तलिखितहाथ से लिखा
विद्यादानविद्या का दान
रणभूमिरण के लिए भूमि
धनहीनधन से हीन
अमचूरआम का चूर्ण
🎨 कर्मधारय (तारीफों का पिटारा)
विशेषण-विशेष्य का संबंध। एक पद दूसरे की विशेषता बताता है।
मृगनयनीमृग के समान नयन
कालीमिर्चकाली है जो मिर्च
महापुरुषमहान है जो पुरुष
कनकलताकनक जैसी लता
परमानंदपरम है जो आनंद
विद्याधनविद्या रूपी धन
नीलांबरनीला है जो अंबर
महात्मामहान है जो आत्मा
🔢 द्विगु समास (गिनती का पक्का)
पहला पद संख्यावाचक होता है, जो समूह को दर्शाता है।
त्रिलोकतीन लोकों का समूह
सप्तऋषिसात ऋषियों का समूह
दोआबदो आबों (नदियों) का मेल
अठन्नीआठ आनों का समूह
पचमढ़ीपाँच मढ़ियों का समूह
शतकसौ का समूह
त्रिभुजतीन भुजाओं का समूह
सतसईसात सौ का समाहार
🎭 बहुव्रीहि (मौन इशारा)
कोई पद प्रधान नहीं, बल्कि किसी तीसरे (देवता या विशेष व्यक्ति) की चर्चा होती है।
गजाननहाथी जैसा मुख (गणेश)
चतुर्भुजचार भुजाएं हैं (विष्णु)
गिरिधरपर्वत उठाने वाले (कृष्ण)
मुरलीधरमुरली बजाने वाले (कृष्ण)
दिगंबरदिशाएँ हैं वस्त्र जिनके (शिव)
घनश्यामबादल जैसा काला (कृष्ण)
पीतांबरपीले वस्त्र वाले (कृष्ण)
निशाचररात में घूमने वाला (राक्षस)
तैयार: हिन्दी व्याकरण स्मार्ट नोट्स
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