समास સમજૂતી 1
📚 समास (Compound): शब्दों का मेल
समास क्या है? सरल भाषा में कहें तो 'समास' का अर्थ है "संक्षेप" यानी छोटा करना। जब दो या दो से अधिक शब्दों को मिलाकर एक नया और छोटा शब्द बनाया जाता है, तो उस प्रक्रिया को समास कहते हैं।
उदाहरण: 'राजा का पुत्र' कहने के बजाय हम कह देते हैं 'राजपुत्र'। बस यही समास है!
उदाहरण: 'राजा का पुत्र' कहने के बजाय हम कह देते हैं 'राजपुत्र'। बस यही समास है!
✨ समास के 6 मुख्य भेद (Types)
समास को याद रखने का सबसे आसान तरीका यह देखना है कि कौन सा शब्द (पद) ज्यादा महत्वपूर्ण है:
1. अव्ययीभाव समास
ट्रिक: इसमें पहला शब्द प्रधान होता है और वह अक्सर 'यथा', 'प्रति', 'आ', 'भर' जैसा होता है।
| समस्त पद | विग्रह (विस्तार) |
|---|---|
| प्रतिदिन | प्रत्येक दिन |
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| आजीवन | जीवन भर |
| रातोंरात | रात ही रात में |
2. तत्पुरुष समास
ट्रिक: इसमें दूसरा शब्द प्रधान होता है और विग्रह करने पर 'का, को, से, के लिए' जैसे शब्द आते हैं।
| समस्त पद | विग्रह (विस्तार) |
|---|---|
| राजपुत्र | राजा का पुत्र |
| रसोईघर | रसोई के लिए घर |
| देशभक्ति | देश के लिए भक्ति |
| तुलसीकृत | तुलसी द्वारा कृत (रचित) |
3. कर्मधारय समास
ट्रिक: इसमें एक शब्द दूसरे की "तारीफ" (विशेषता) बताता है। (कैसा है?)
| समस्त पद | विग्रह (विस्तार) |
|---|---|
| नीलकमल | नीला है जो कमल |
| महात्मा | महान है जो आत्मा |
| चंद्रमुख | चंद्रमा के समान मुख |
| चरणकमल | कमल के समान चरण |
4. द्विगु समास
ट्रिक: इसका पहला शब्द हमेशा एक संख्या (Number) होता है।
| समस्त पद | विग्रह (विस्तार) |
|---|---|
| नवरत्न | नौ रत्नों का समूह |
| चौराहा | चार राहों का समूह |
| तिरंगा | तीन रंगों का समूह |
| सप्ताह | सात दिनों का समूह |
5. द्वंद्व समास
ट्रिक: इसमें दोनों शब्द बराबर होते हैं और बीच में अक्सर 'और' या '-' (योजक चिन्ह) होता है।
| समस्त पद | विग्रह (विस्तार) |
|---|---|
| माता-पिता | माता और पिता |
| रात-दिन | रात और दिन |
| पाप-पुण्य | पाप और पुण्य |
| सुख-दुख | सुख और दुख |
6. बहुव्रीहि समास
ट्रिक: इसमें लिखे हुए शब्दों का महत्व नहीं होता, बल्कि वे मिलकर किसी तीसरे (भगवान या विशेष व्यक्ति) की ओर इशारा करते हैं।
| समस्त पद | विग्रह (विस्तार) |
|---|---|
| लंबोदर | लंबा है उदर (पेट) जिसका (गणेश जी) |
| दशानन | दस हैं आनन (सिर) जिसके (रावण) |
| पीतांबर | पीले हैं वस्त्र जिसके (कृष्ण जी) |
| नीलकंठ | नीला है कंठ जिसका (शिव जी) |
याद रखने की मास्टर ट्रिक:
संख्या = द्विगु | और = द्वंद्व | तारीफ = कर्मधारय | तीसरा अर्थ = बहुव्रीहि
संख्या = द्विगु | और = द्वंद्व | तारीफ = कर्मधारय | तीसरा अर्थ = बहुव्रीहि
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